vinay samir

गुरुवार, 27 जून 2013


तुमने लपेट ली है अजनबीपन की चादर ..
चलो मैं भी ख़ामोशी ओढ़कर सो जाता हूँ ...!!!! - विनय समीर
प्रस्तुतकर्ता Unknown पर 10:44 am
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