रविवार, 30 जून 2013

बदले में ...

तुमने लपेट ली है अजनबीपन की चादर   ..
चलो मैं भी ख़ामोशी ओढ़कर सो जाता हूँ ...!!!! - विनय समीर

गुरुवार, 27 जून 2013

सुबहाभिवादन  ..  भोर प्रणाम .. मित्रों ..

मरे हैं रातभर हम ख्वाब में तेरे बिना हमदम ..
कि अब सुबह है आशा की चलो फिर जी लिया जाये ..!! - विनय समीर  28/6/13

ये सियासतदां...


तास्सुबी लोग हैं ..रस्सी का सांप बना देते हैं ..
जरुरत पे तो ये गधे को भी बाप बना लेते हैं ..!! -विनय समीर

तुमने लपेट ली है अजनबीपन की चादर ..
चलो मैं भी ख़ामोशी ओढ़कर सो जाता हूँ ...!!!! - विनय समीर

मेरी जुबानी ..है ये कहानी

बिना दस्तक दिए जो चला आये घर में ..
दिल के नज़दीक बस वो ही शख्स होता है ../ - विनय समीर

बुरा हूँ सो खरा कह देता हूँ ..
जो होता अच्छा तो आपसी कहता ../ - विनय समीर 

आँख से आंसू गिरते क्यूँ हैं ..
मिल के हम बिछुड़ते क्यूँ हैं ...
नश्तर दिल में चुभते क्यूँ हैं .....
ये कोई हमें बतलायेगा क्या.........!!! - विनय समीर

गीली आँखे भीगा दामन...
सीला-सीला सा है ये मन ...
पथरीली हैं आशाएं सारी .....
धूल-धूसरित सा है ये तन ...!!! - विनय समीर


अपने कहने को हैं.. 
सपने कहने को हैं..!
मुश्किल में है ये मन ..
सपना है अपना या तुम हो ..!!!!! - विनय समीर

दुखती हुई हर रग है ..
अपना सा ये सारा जग है ..
फिर भी एक अकेलापन है ..
कौन है झूठा ..बतलाओ तुम ..!!! - विनय समीर

आज आंसू की कदर जानता यहाँ क्यूँ कोई नहीं ..
क्यूँ ये दरिया आँख से बहता है लावारिसों कि तरह .....विनय समीर

ख़ुदारा गम तो दे देना मगर ऐसा हमदम न देना ..
जो हरदम तोड़े दिल और कह दे .. हाल पहले से बेहतर है .....विनय समीर


ये क्या गज़ब दुस्साहसी मसअला है यारो..
क्या कोई बुझा चिराग फिर से जला है यारो..! 
अजीब सा रंग आज फिर बादलों का क्यूँ है ..
शायद सरे आम फिर कोई घर जला है यारो..!! - विनय समीर

हकीकत ऐ हयात ..

ख़ारों के बीच कट रही है ये ज़िन्दगी अपनी तो ..
बरसों से ढूंढ़ रहा हूँ अपने हिस्से का सलीब यारो ../ - विनय समीर